Wednesday, January 14, 2009

इतिहास

इतिहास
अजमेर (Ajaya-संस्कृत में मेरु) Dushyant चौहान द्वारा देर से सातवीं शताब्दी में स्थापित किया गया था. वह जो देश जबकि तुर्की आक्रमण की दोहराया तरंगों भारत भर में बह शासन करने के लिए जारी की चौहान वंश की स्थापना की. अजमेर मुहम्मद Ghor की, दिल्ली सुल्तान के संस्थापक, के द्वारा 1193 में जीता था. इसकी आंतरिक सरकार वैसे, चौहान शासकों के विजेता को एक भारी श्रद्धांजलि के भुगतान पर सौंप दिया गया था. अजमेर तो दिल्ली के लिए 1365, जब तक जब यह मेवाड़ के शासक ने कब्जा कर लिया था जागीरदार बने रहे. 1509 अजमेर में मेवाड़ और मारवाड़ के महाराजाओं के बीच विवाद का एक स्रोत है, और बन अंततः 1532 में मारवाड़ शासक द्वारा पर विजय प्राप्त की थी. अजमेर 1559 में मुगल बादशाह अकबर के द्वारा पर विजय प्राप्त की थी. जब तक यह मराठों को ceded यह मुगलों के हाथ में होना, सामयिक विद्रोहों के साथ, 1770 तक जारी रहा. उस समय तक 1818 अजमेर से एक चल रहे संघर्ष का दृश्य है, मेवाड़ और मारवाड़ महाराजाओं, जिस से वह अक्सर मराठों द्वारा retaken था द्वारा अलग अलग समय पर कब्जा किया जा रहा था. 1818 में मराठों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को 50,000 रुपये अजमेर के लिए बेच दिया. तब से अजमेर के बावजूद 1857 के युद्ध के दौरान आजादी के स्थिर शासन का आनंद लिया गया है, Nasirabad के पास शहर में garission पर कुछ भारतीय sepoys इस विद्रोह में शामिल हो गए. ब्रिटिश राज में, अजमेर एक एजेंट के द्वारा राज्यपाल जनरल को नियंत्रित था [AGG] राजपूताना की निगरानी. 1947 में स्वतंत्रता के बाद, अजमेर एक मुख्य आयुक्त के तहत कुछ समय के लिए एक केन्द्र administrated राज्य के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी. अजमेर अंततः राजस्थान राज्य के साथ विलय कर दिया गया था.

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